राजस्थान सरकार का बड़ा सामाजिक फैसला, जारी हुई अधिसूचना
जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेश की नवसृजित ग्राम पंचायतों के प्रथम चुनाव को लेकर एक अहम निर्णय लेते हुए सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जिन नवगठित ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जाति (SC) के मतदाताओं की संख्या 15 प्रतिशत या उससे अधिक है, वहाँ प्रथम बार होने वाले पंचायत चुनाव में सरपंच पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा।
सरकार का यह निर्णय राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 12(6) के तहत लागू किया गया है। इस प्रावधान के पीछे सरकार का उद्देश्य पंचायत स्तर पर अनुसूचित जाति वर्ग की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करना और उन्हें नेतृत्व के अवसर प्रदान करना बताया गया है।
केवल प्रथम चुनाव तक ही लागू रहेगा नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आरक्षण व्यवस्था केवल नवसृजित पंचायतों के पहले चुनाव तक ही सीमित रहेगी। इसके बाद दूसरे चुनाव से पुनः सामान्य रोस्टर प्रणाली लागू कर दी जाएगी। यानी द्वितीय कार्यकाल से पंचायतों में वही आरक्षण व्यवस्था लागू होगी जो अन्य ग्राम पंचायतों में लागू है।
इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस प्रावधान को स्थायी नहीं बल्कि विशेष परिस्थिति में अस्थायी व्यवस्था के रूप में लागू कर रही है, ताकि नवसृजित पंचायतों में सामाजिक संतुलन स्थापित हो सके।
सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ग्रामीण राजनीति में अनुसूचित जाति वर्ग को मुख्यधारा में लाने में अहम भूमिका निभाएगा। अब तक कई पंचायतों में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस नए नियम से अब नवगठित पंचायतों में SC वर्ग को नेतृत्व की भूमिका सीधे तौर पर मिलेगी।
सरकार का दावा है कि इससे पंचायतों में फैसले अधिक संतुलित और सर्वसमावेशी होंगे, जिससे विकास योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचेगा।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। जहां सामाजिक संगठनों और दलित संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं कुछ विपक्षी दलों ने इसे चुनावी दृष्टिकोण से लिया गया कदम बताया है। हालांकि, सरकार की ओर से साफ किया गया है कि यह फैसला पूरी तरह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप और सामाजिक न्याय के उद्देश्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।
ग्रामीण राजनीति पर पड़ेगा असर
नवसृजित पंचायतों में इस नियम के लागू होने से कई क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। जिन गांवों में SC मतदाता निर्णायक संख्या में हैं, वहाँ अब सरपंच पद पर सीधे उसी वर्ग का प्रतिनिधि चुना जाएगा। इससे गांव की राजनीति में नई नेतृत्व शैली और नई सामाजिक संरचना देखने को मिल सकती है।
स्पष्ट संदेश: प्रतिनिधित्व ही लोकतंत्र की ताकत
राज्य सरकार का यह फैसला एक स्पष्ट संकेत देता है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। पंचायत जैसे जमीनी स्तर की संस्थाओं में समान अवसर मिलने से ही असली विकास संभव है।
सरकार के इस निर्णय से अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद पैदा हुई है, जो आने वाले चुनावों में सक्रिय भागीदारी निभाते नजर आएंगे।
